सॉंग्त्सेन पुस्तकालय, देहरादून
सॉंग्त्सेन पुस्तकालय, कुल्हान, सहस्रधारा रोड, देहरादून

सिद्ध एक आवासीय चिन्तन-गोष्ठी का आयोजन कर रहा है — सिद्ध परिसंवाद — जो महात्मा गाँधी, धर्मपाल जी एवं गुरुजी रवीन्द्र शर्मा के विचारों के आलोक में भविष्य की दिशा खोजने का प्रयास है।

आधुनिक सभ्यता का प्रश्न

गाँधी जी ने बहुत पहले आधुनिक सभ्यता और उससे प्रभावित आधुनिक व्यवस्थाओं के छद्म एवं रुग्ण स्वभाव को देख लिया था। बाहरी चमक के पीछे जो असलियत है, उसे उन्होंने पिछली शताब्दी के आरम्भ में ही 'हिन्द स्वराज' के माध्यम से हमें समझाने का प्रयास किया।

आसान भाषा में और विस्तार से उन्होंने आधुनिक तंत्र की मुख्य व्यवस्थाओं — शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय-प्रणाली, आधुनिक लोकतन्त्र और तकनीक — को एक-एक करके हमारे सामने खोलकर रखा। वे हमें एक ऐसी कुंजी दे गए, जो आज भी आधुनिकता की सीरत को समझने में सहायक है।

भारतीय समाज की प्रामाणिक समझ

आधुनिकता के प्रभाव से पहले भारत और भारत का समाज कैसा था — इसकी प्रामाणिक समझ हमें धर्मपाल जी के काम से मिलती है। धर्मपाल जी ने अपने शोध के माध्यम से इस बात के प्रमाण एकत्रित किए कि भारत, यहाँ के साधारण जन का दिमाग और यहाँ का समाज किस प्रकार अपने सार्वजनिक जीवन को सुचारु रूप से चलाता था।

अंग्रेजों के आने तक, हमारी व्यवस्थाएँ आज के राष्ट्र-राज्य के जमाने जैसी राजकीय न होकर सामाजिक थीं। इन व्यवस्थाओं के बीच सामंजस्य था और उनमें जीवन्तता थी।

जीवन्त सामाजिक व्यवस्थाओं की समझ

रवीन्द्र शर्मा जी ने आदिलाबाद के अपने छोटे-से इलाके में विभिन्न कारीगर समुदायों के बीच समय बिताकर न केवल उनके हुनर सीखे, वरन् उन व्यवस्थाओं को भी बारीकी से समझा, जिनके अन्तर्गत समाज चलता था। इससे आधुनिक व्यवस्था एवं सोच और पारम्परिक व्यवस्थाओं एवं सोच के बीच का विरोधाभास समझ में आता है।

इस प्रकार हम देखते हैं कि गाँधी जी, धर्मपाल जी और रवीन्द्र शर्मा जी, समझ के स्तर पर, एक-दूसरे के पूरक हैं।

परिसंवाद का आशय

इस पृष्ठभूमि में हम तीन दिवसीय चिन्तन-गोष्ठी के आयोजन में हैं। आशय यह है कि आज हम जिस काल और जिन आधुनिक व्यवस्थाओं के बीच हैं, क्या उनमें कोई सार्थक पहल या रास्ता — अपने लिए, किसी छोटे समूह के लिए अथवा व्यापक स्तर पर भी — निकल सकता है?

हम केवल बाहर की व्यवस्थाओं को ही न देखें, वरन् अपने भीतर भी देखें कि हमारे सोचने की बैठक में आधुनिकता कहाँ-कहाँ बैठी हुई है। सभी मित्र व्यक्तिगत स्तर पर गम्भीर मनन के लिए यहाँ से कुछ न कुछ प्राप्त करके जाएँगे।

सॉंग्त्सेन पुस्तकालय — बाहरी दृश्य
पुस्तकालय परिसर
सॉंग्त्सेन पुस्तकालय — भीतरी कक्ष
चिन्तन-गोष्ठी का स्थान

स्थान एवं कार्यक्रम

📍 स्थान सॉंग्त्सेन पुस्तकालय
कुल्हान, सहस्रधारा रोड, देहरादून, उत्तराखंड
📅 तिथि 11–14 नवम्बर 2026
आगमन एवं आरम्भ: 11 नवम्बर, शाम · समापन: 14 नवम्बर
🚗 दूरी देहरादून रेलवे स्टेशन से लगभग 10 किमी · हवाई अड्डे से लगभग 34 किमी
₹ सहयोग ₹7,000 प्रति प्रतिभागी
इसमें 11 से 14 नवम्बर तक आवास एवं भोजन सम्मिलित है।

पंजीकरण 

पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए कुल सहयोग राशि का 50% अर्थात ₹3,500 का भुगतान करना होगा। प्रतिभागियों की संख्या सीमित रहेगी।

अनिल मैखुरी: 9410101490 / 8077985185  ·  आशीष गुप्ता: 9425325659

निरन्तर संवाद, साथ रहना और सामूहिक मनन इस प्रक्रिया के अभिन्न अंग हैं; अतः पूरे कार्यक्रम में उपस्थित रहने का अनुरोध है।

💳 भुगतान / Payment

🏠 बैंक हस्तांतरण (NEFT / IMPS / UPI)

खाताधारक Society for Integrated Development of Himalayas (SIDH)
खाता सं. 016401015817
खाता प्रकार बचत खाता (Savings)
IFSC ICIC0001595
बैंक ICICI Bank Ltd,
The Mall Road, Mussoorie 248179

भुगतान के बाद कृपया WhatsApp पर रसीद / स्क्रीनशॉट अवश्य   भेजें।

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📋 पंजीकरण — सिद्ध परिसंवाद नवम्बर 2026

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